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Full Version: मालती
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राका जब और नीचे आया तो उसे महसूस हुआ कि मानसी की ड्रेस में साइड से चेन है... मानसी के बायीं बगल के नीचे से राका ने एक झटके में चेन नीचे खींच दी.... “उम्म्ह... राका .... यहाँ नहीं....” मानसी फुस्फुसाई...
“यहाँ नहीं” सुनते ही राका के दिल की घंटी बजी और उसने मानसी को तुरंत छोड़ दिया... और बोला... “लगा ले चेन वापस....”
मानसी को ये थोडा अजीब लगा....उसने चेन ऊपर चढ़ा ली....
राका ने मानसी की कमर में हाथ डाला.... और बोला.. “चल फिर कहीं और चलें”
राका मानसी को लेके सीधा हर्षित के फ्लैट पंहुचा.... मानसी राका के इरादों को समझ रही थी.. पर आज वो भी हद से गुजर जाना चाहती थी...
फ्लैट के अन्दर पहुचते ही... राका ने एक झटके में चेन फिर से नीचे खींच दी.... और मुस्कुराते हुए बोला... “यहाँ ठीक है?...” और मानसी को आँख मारी
“कितने नॉटी हो तुम...” मानसी बोली!
राका ने मानसी को फिर से चूम लिया... चूमते हुए ही उसकी ड्रेस उतार दी...
मानसी अब ब्लैक ब्रा और रेड पैंटी में राका की बाहों में थी... राका के हाथ अब दोनों साइड से मानसी की पैंटी के अन्दर दस्तक दे रहे थे....
वो मानसी को टीज़ कर रहा था...
मानसी ने भी राका की शर्ट के बटन खोल दिए.... राका ने शर्ट उतार फेंकी...
राका मानसी को चांट रहा था... उसके कोमल जिस्म को अपने होंटों से काट रहा था... ये सब करते हए ही वो मानसी को बेडरूम तक ले पंहुचा....
“जानू मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है...”
“क्या है”
“मेरा पैंट खोल जानू....”
“उम्म्म... नॉटी यू... राका...”
“अरे मेरी जान.... खोल न....”
मानसी खुद को रोक नहीं पाई.... उसने राका के जींस का बटन खोल दिया.... और ज़िप भी नीचे कर दी.... बाकी काम राका ने खुद कर लिया... जींस उतार दी... अब वो ब्लैक फ्रेंची पे था.... जो केवल उसके साढ़े सात इंच के तगड़े लंड को ढके हुए थी.... मानसी शर्मा गई....
“जान नीचे देखो न.... इट्स फॉर यूं... अब से ये सिर्फ तुम्हारा है” और राका ने मानसी का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया....
मानसी उसके लंड को फ्रेंची के ऊपर से ही फील कर रही थी.... राका ने धीरे से मानसी के चुत्तड पे चपाट मारी.... “ओह मेरी जान.... गेट ओं योर नीज़... एंड फील आईटी विद योर माउथ”
मानसी तो मानो राका के वश में थी.... उसने देर नहीं लगाई... अब वो घुटनों पे थी... और सामने था राका का प्रेम-हथियार! राका ने खुद ही अपनी फ्रेंची नीचे सरका दी! और अपने ताने हुए लंड को मानसी के चेहरे पे टच कराया...
“अरे जानू....करो न....” राका ने रिक्वेस्ट की...
मानसी का ये फ़स्ट टाइम था... इसलिए वो थोडा सा झिझक रही थी.... पर राका की रिक्वेस्ट को ठुकरा नहीं पाई वो....
उसने राका के लंड को थोड़ा झिझकते हुए चूमा...
“यूज़ योर टंग बेबी... टेक इट इन योर माउथ” राका मानसी को सिखा रहा था...
मानसी ने जैसे ही अपना मुह खोला... राका ने अपना लंड मानसी के मुह में ठांस दिया... आगे का काम मानसी के लिए आसान हो गया... अब वो राका के लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी.... उसके लंड की नसों को महसूस कर रही थी...


राका के लिए अब सब्र करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था.... उसने मानसी के मुह से अपना लंड निकाला और मानसी को उठा के बिस्तर पे पटक दिया.... और खुद भी मानसी के ऊपर आ गया...
मानसी का जिस्म राका ने अपने जिस्म में जकड़ा हुआ था.. उसकी दायें हाथ की उंगलिया मानसी की चूत में हरकत कर रही थी.... मानसी की बेचैनी को महसूस करते हुए राका ने अपना लंड मानसी की चूत में रखा... और धीरे धीरे हौले हौले अन्दर डालने के लिए धक्के लगाए.... राका को ये जानने में देर नहीं लगी की मानसी की चूत एकदम फ्रेश है.... मानसी जैसी माल कुवारी होगी, ये उसने नहीं सोचा था.... उसने दो झटकों में मानसी का कौमार्य ले लिया.... अब मानसी कुवारी नहीं थी... राका का पूरा लंड मानसी की चूत के अन्दर था.... मानसी की चीख पूरी सोसाइटी में गूंजी होगी...इतना तेज़ चिल्लाई थी वो....इस दर्द से उसकी आँखों में आन्सू आ गए थे... राका अपना लंड पूरा अन्दर डाल के थोड़ा रिलैक्स हुआ और मानसी को चूमने चाटने लगा.... उसने मानसी की आँखों में देखा.... और फिर उसे चूम लिया.... लिप्स लॉक होते ही... राका ने स्ट्रोक्स मरने शुरू किये.... लंड जब पूरा अन्दर जाता तो मानसी की आँखे पूरी खुल जाती.... उसकी चीख दोनों के चुम्बन में कही खो जाती.... राका दोनों हाथो से मानसी को जकड़ लेता जब लंड पूरा अन्दर डालता....
“आह..... उह.... उई माँ..... आह.... ऊऊ.... आह.... उम्म्मम्ममम्म म्मम्मआःह्ह” चुम्बन तोड़ते ही मानसी की आवाजों से कमरा गूँज उठा....
राका किसी घोड़े की तरह से चोद रहा था.... मानसी को भी अब चुदवाने में मजा आ रहा था.... ये उसके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं था...
“उह... आह..उफ्फ्फ...” मानसी की आवाजों से राका के स्टैमिना का पता कोई भी लगा सकता था... पिछले 20 मिनट से राका लगातार धक्के मार रहा था... मानसी का पानी अब तक दो बार निकल चुका था...
वो भी अब गांड उचका उचका के चुदवा रही थी....
राका इतनी कसी हुई चूत के पूरे मजे ले रहा था.... राका भी अब बस झड़ने वाला ही था....
उसने धक्के और तेज़ कर दिए.... कमरे में दोनों की आवाजे गूँज रही थी.... फ़प... फ़प... करके राका के अन्डू मानसी की चूत के नीचे के हिस्से पे टकरा रहे थे...
आह.... ऊऊ... ओह... आह..... उम्म्ह..... और राका ने मानसी की चूत को अपने प्रेम रस से भर दिया... और मानसी के ऊपर निढाल होक गिर गया....
मानसी भी एक बार और झड़ी.... और राका को अपने ऊपर दबा लिया...
दोनों एक दूसरे की बाहों में इसी तरह निढाल होके सो गए!
............................................
“आह... उफ्फ्फ ऊईइ मा... ठाकुर जी.... आह...” मालती ठाकुर के नीचे दबी कामक्रीडा का आनंद ले रही थी... आज वो पूरे 20 दिन बाद चुद रही थी... और आज ठाकुर उसे चोदने ही आया था.... नए शहर में मालती को अभी तक कोई नया लंड नसीब नहीं हुआ था...
“पता है मैंने आपको कितना मिस किया...”
“जानता हूँ मेरी रांड...तभी तो आ गया आज तेरे पास”
और फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए....
ठाकुर ने 20 दिन की कसर आज एक दिन में ही पूरी कर दी.... वो मालती को चौथी बार चोद रहा था...
रात रंगीन करने के बाद ठाकुर फिर वापस चला गया...
आज होटल की हॉस्पिटैलिटी मैनेजर प्रिया का शक यकीन में बदल गया.... उसे पहले से ही अंदाजा था कि ठाकुर और मालती के बीच में कुछ तो है... आज उसने देख भी लिया था...
सुबह के नौ बज रहे थे... तभी होटल में करीब 40 साल का एक हट्टा-कट्टा आदमी आया, उसने कुरता पैजामा पहन रखा था... कुरते के बगल से उसकी रिवाल्वर झाँक रही थी... वो आके सीधे प्रिया के केबिन में जाके बैठ गया....
ये अफरोज था... शहर के बाहुबली विधायक का खास आदमी... हर महीने वो अपना हिस्सा लेने होटल आता था... और आज भी वो पैसे लेने ही आया था...
उसके आते ही प्रिया मालती के केबिन गई और चेक साइन करने को बोली...
मालती के लिए ये नया था.... उसने साइन करने से मना कर दिया.... प्रिया ने मालती को समझाने की काफी कोशिश की पर वो नहीं मानी... और सीधे अफरोज के सामने जा पहुची,,,
मालती: कुछ नहीं मिलेगा आपको यहाँ...
अफरोज: अरे पगला गई है क्या... जानती है तू क्या बोल रही है?
मालती: हाँ... जानती हूँ क्या बोल रही हूँ.... अब यहाँ की मालिक मैं हूँ .... और आज से कोई हिस्सा विस्सा नहीं मिलेगा इधर, दुबारा शकल मत दिखाना अपनी
अफरोज: (गुस्से में...) साली.... नइ है तू यहाँ... जितना जल्दी हो समझ जा इधर के कायदे... वरना हम लेने पे आ गये तो तेरी भी न छोड़ेंगे.. समझी...
मालती: शाट अप... एंड गेट आउट... अभी इसी वक्त
अफरोज तमतमाता हुआ होटल से निकल गया....
करीब आधे घंटे बाद एक दर्जन गुंडे होटल में आके तोड़ फोड़ करने लगे.. और होटल स्टाफ के साथ भी मारपीट की...
मालती ने पुलिस को इस बारे में इन्फॉर्म किया... पर उसे नहीं पता था की यहाँ पुलिस तो विधायक के इशारे के बिना कोई एक्शन नहीं लेती...
होटल की बिजली सप्लाई भी काट दी गई....
फिर मालती ने ठाकुर को फोन किया और पूरी कहानी सुनाई... मालती का साथ देने की बजाय ठाकुर मालती पे चिल्लाने लगा...
ठाकुर: तू नौकरानी है वहा.... मालकिन नहीं समझी.... कौन भरेगा इतना नुक्सान? और पैसे देने न देने का डिसाइड मैं करूंगा.... तू होती कौन है?
मालती : अरे आप तो उल्टा मेरे पे चिल्ला रहे हैं...
ठाकुर: और क्या पूजा करूँ तेरी.... रांड साली... जा पैसे ले.... अगले महीने के भी ले लेना... और विधायक जी के घर पे खुद जाके पैसे दे और माफ़ी मांग! समझी! और ठाकुर ने फोन काट दिया!
मालती को ठाकुर पे बहुत गुस्सा आया... पर बेचारी कर भी क्या सकती थी... जो गलती उसने की थी उसे सुधारना तो पड़ेगा ही....




शाम को मालती रंगदारी लेके खुद विधायक जी के ऑफिस पहुची...
हमेशा की तरह आज भी मालती पलंगतोड़ लग रही थी, काली साड़ी, ऊपर हमेशा की तरह आज भी स्लीवलेस ब्लाउज ही पहना हुआ था... बला की खूबसूरत लग रही थी... बगल में काला पर्स... दो इंच हील सैंडल!
विधायक लल्लन सिंह अन्दर अपने ऑफिस में कुछ अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे थे... ओह आपको लल्लन सिंह के बारे में बताना भूल गई...
लल्लन सिंह पिछले 20 साल से इलाके के बाहुबली विधायक हैं... आस पास के 5-6 विधायकों का समर्थन रहता है उनके साथ! स्वाभाव से अक्खड़ बकैत और दबंग! शहर में उनकी परमीशन के बिना एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता है! शहर के हर धंधे से रंगदारी आती है उनके पास! जिस समय मालती लल्लन सिंह के ऑफिस पहुची उस समय, डीएम और एसपी हाजिरी लगाने आये हुए थे लल्लन जी के पास!
मालती के ऑफिस पहुचते ही सब उसे आँखे फाड़ फाड़ के घूरने लगे... विधायक जी के ऑफिस में एक औरत, वो भी शाम को सात बजे... पक्का आज कोई नई आइटम बुलाई है लल्लन ने... वहां मौजूद लोगों की आँखों से हवस टपक रही थी!
“हाँ मैडम, क्या चाहिए? किससे मिलना है?” एक आदमी ने पूछा...
मालती उसके पास पहुची और बोली... “जी मुझे विधायक जी से मिलना है... जरूरी काम है मुझे उनसे”
उस आदमी ने मालती को ऊपर से नीचे तक देखा... और मुस्कुराया...
“ओह... जरूरी काम है... वैसे विधायक जी ने तो हमें नहीं बताया कि उन्होंने आज के लिए किसी को ऑफिस बुलाया है... और तुम्हे नहीं पता, विधायक जी “जरूरी काम” ऑफिस में नहीं करते... फार्महाउस में करते हैं!
“जी?? उन्होंने मुझे नहीं बुलाया है, मैं मिलने आई हूँ उनसे... आप प्लीज बताएँगे मुझे कहाँ है वो” मालती ने अपनी झल्लाहट को काबू में रखते हुए कहा!
“अच्छा अच्छा ठीक है... वो अभी मीटिंग में हैं.... तुम वेट करो यही बाहर...” आदमी ने मालती के क्लीवेज को घूरते हुए कहा!
मालती कुछ नहीं बोली... और सामने पड़े सोफे पर बैठ कर इंतज़ार करने लगी!
अफरोज़ अन्दर आता है और मालती को देखके खुश होता है....
“ओह... तो आ गई तू...देख लिया न अपनी एक गलती का अंजाम” अफरोज़ ने मालती को देखते हुए कहा...
“जी मुझे विधायक जी से मिलना है...” मालती खुद को संभालते हुए बोली!
“अरे मिल लीजियेगा... विधायक जी से भी मिल लीजियेगा... पहले हमसे तो मिल लीजिये” अफरोज़ ने शरारती मुस्कान के साथ कहा और मालती के साथ पड़े सोफे पे बैठ गया...
मालती: “जी सुबह के लिए मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ... वो मैं भावनाओं में कुछ जादा ही बोल गई थी”
अफरोज़: “लेन-देन के मामले में हमें कोई गुस्ताखी बर्दास्त नहीं है”
मालती: “जी इस बार हुई गुस्ताखी को माफ़ कर दीजिये.. आगे से मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ... शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी” (मालती मुस्कुरा के बोली)
अफरोज: “देखो माफ़ी और सजा का डिपार्टमेंट तो विधायक जी का है... अब वो ही देखेंगे”
मालती: “जी कब तक चलेगी मीटिंग” थोड़ी थकी हुई आवाज में मालती ने पुछा...
अफरोज़: “रुको मैं देखता हूँ...”
अफरोज़ उठ के विधायक जी के केबिन में गया...
और लल्लन सिंह के कान में जाके बोला- “सरकार वो होटल की मैनेजर आई है... माफ़ी मांगने... क्या करना है उसका”
लल्लन: “अरे वो तो पता था हमें आयेगी वो... अब उसके पापों का प्रायश्चित तो उसे ही करना पड़ेगा न... डीएम साहब आप निकलिए फिर, और एसपी साहब आप रुकिए जरा... और हाँ अफरोज़ .. तू भेज उसे अन्दर”
अफरोज और डीएम बाहर गए और अफरोज़ ने मालती को अंदर भेज दिया!
कमरे में विधायक लल्लन सिंह और एसपी बैठे हुए थे...
मालती अन्दर घुसी....
मालती: “जी नमस्ते.....”(दोनों हाथ जोड़ के)
विधायक: “अरे नमस्ते नमस्ते.... आइये मैडम.... तशरीफ़ रखिये”
विधायक और एसपी दोनों की आँखे खुली की खुली रह गई मालती को देख के...
मालती हलके से मुस्कुराती हुई एसपी के बगल वाली कुर्सी में बैठ गई...
एसपी ने अपनी कुर्सी मालती की ओर घुमा ली...
विधायक: “आप जानती है न कौन हैं हम”
मालती: “जी आपको कौन नहीं जानता...”
विधायक: “नहीं जानती तो जान ले...वरना अच्छा नहीं होगा...”
“अब एसपी साहब क्या बताएं, इन औरतों को समझना मुश्किल है.... मोहतरमा ने सुबह जितने पैसे देने से मन कर दिए थे, अब उसके दोगुने पैसे होटल के रेनोवेशन में खर्च होंगे...”
एसपी: “हाहा... ये बात तो सही कही आपने.... औरतों को समझना मुश्किल ही है, पर सरकार आपको समझाना अच्छी तरह आता है”
विधायक: “अरे तभी तो गई ये मोहतरमा दौड़ते हुए” हाहा “तो क्या डिसाइड किया? (मालती की ओर देख कर)
मालती: “जी वो... डिसाइड क्या करना है... ये आपके पैसे.... और प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिये... वो मैं भावनाओं में बह के कुछ जादा ही बोल गई थी अफरोज़ से!”
विधायक: “हाहा... अब आप जैसी खूबसूरत औरत से पैसे...”
एसपी: “अरे इनके जैसियों को तो पैसे देने की आदत होगी आपको”
विधायक: “हाहा.... क्या बात कहे एसपी साहब” “अरे अफरोज़....(जोर से चिल्लाते हुए)”
अफरोज भागता हुआ आया: “जी सरकार”
विधायक: “अरे मुद्रा ले जाओ.... मैनेजर साहिबा खुद देने आई हैं”
मालती: “जी अगले महीने का भी है”
विधायक: “अरे अगले महीने का काहे.... अगले महीने का अगले महीने देने आना... इसी बहाने आपसे मुलाक़ात तो हो जाएगी”
मालती: “जी मुलाकात के लिए बहाने की क्या जरूरत है, वो तो ऐसे भी हो सकती है”
विधायक: “अफरोज लेजा पैसे....”
“हाँ तो मोहतरमा.... ठाकुर का फोन आया था हमारे पास, हमने तो उसे बता दिया है कि गलती किसकी है”
मालती: “जी मेरी उनसे बात हुई... मैं अपनी गलती मान रही हूँ... मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था....”
विधायक: “एसपी साहब आप निकलिए अब...”
विधायक के इशारा करते ही एसपी उठा और विधायक के पैर छूए.... “जब सरकार सेवा चाहिए हो तो याद कर लीजियेगा” और वो चला गया!
अब कमरे में मालती थी और उसके सामने दबंग विधायक लल्लन सिंह जी!
विधायक: “अब बताइये मोहतरमा ... क्या किया जाय आपका...”
मालती: “जी मैं अपनी करनी की हाथ जोड़कर माफ़ी मांगती हूँ आपसे... आगे से आपको कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी”
विधायक ने मालती के दोनों जुड़े हुए हाथों को अपने हाथो के बीच पकड़ लिया....
विधायक: “अरे नहीं नहीं.. ये क्या कर रही हैं आप..... अब देखिये हम माफ़ी देना तो जानते नहीं.... पर हम आपको एक मौका जरूर देंगे...”
मालती: “मुस्कुराते हुए...जी मैं आपकी शुक्रगुजार हूँ...”
विधायक: “अरे... आप बातें बड़ी मीठी मीठी करती हैं....” (ठाकुर मालती के हाथो को अपने हाथो के बीच दबाये मसल रहा था...)
मालती थोड़ा शर्मा गई....
विधायक: “शादी नहीं हुई तुम्हारी अभी....” (मालती की मांग में सिन्दूर और गले में मंगलसूत्र न देख विधायक के मन में काफी देर से ये सवाल था...)
मालती: “जी.. वो नहीं रहे...”
विधायक: “अरे.... ओह... सॉरी ...सॉरी....पर तू ठाकुर से कैसे मिली”
मालती: “जी ठाकुर जी मेरे पति के दोस्त थे... तो उनकी डेथ के बाद.... ठाकुर जी ने ही सहारा दिया हमें”


“ठरकी साला” विधायक ने मन में सोचा....
विधायक: “बच्चे? बच्चे नहीं हैं तेरे?” (इतना जानने के बाद ‘आप और मोहतरमा’ से ‘तू’ पर आने में विधायक को देर नहीं लगी)
मालती: “जी हैं... दो बच्चे हैं मेरे.... एक बेटी है 19 साल की.... और एक छोटा बेटा है, वो 12वी में पढता है”
विधायक: “वैसे तुझे देख के लगता नहीं कि तेरे इतने बड़े बड़े बच्चे होंगे...”


मालती विधायक की बात सुन कर मुस्कुराई....


वो मालती के हाथो को मसल रहा था....
विधायक: “वैसे तुझे यहाँ कोई परेशानी तो नहीं है न.... कोई भी परेशानी हो... तो इस नाचीज़ को बस याद कर लीजियेगा””


मालती: “अरे नहीं नहीं... वो तो बस आज ही थोड़ा....”
विधायक मालती की खूबसूरती में आज की बात भूल ही गया था....


विधायक: “अरे आज जो हुआ... उसकी जिम्मेदार तो तू खुद है....यहाँ रहना है तो देनी तो पड़ेगी ही.... और अगर ख़ुशी खुशी नहीं देगी, तो लेना हमें अच्छी तरह आता है... अब देखो आ गई न तू खुद देने...” (मालती का हाथ दबाते हुए बोला)
(वो मालती के जिस्म का पूरा मुआइना कर रहा था.... उसकी नज़रें बार बार मालती की क्लीवेज पर टिक जातीं)
मालती: “जी वो उसके लिए मैं आपसे एक बार फिर से माफ़ी मांगती हूँ... और आगे से ऐसा नहीं होगा... ये भी वादा करती हू आपको” (मालती ने मुस्कुराते हुए कहा...)
मालती की मुस्कान पर विधायक जी फिर से लट्टू हो गए....
विधायक: “अरे माफ़ किया.... माफ़ किया.... पर हमारी भी कुछ शर्तें हैं...” (मालती के जिस्म पर नजर ऊपर नीचे की)


मालती: “जी क्या शर्तें?”
विधायक: “बड़ी जल्दी है शर्तें जानने की” हँसते हुए ठाकुर ने कहा....


मालती ठाकुर की इस बात पर शर्मा गई.... और लल्लन विधायक ने एक बार फिर उसके दोनों कोमल हाथों को अपने हाथो से दबा दिया....
नजारा ऐसा था मानो दोनों के हाथ सम्भोग कर रहे हों....
या विधायक बार बार मालती को इशारा कर रहा था... कि जो हाल अभी उसके हाथों का है, भविष्य में वाही हाल उसके पूरे जिस्म का होने वाला है...
और मालती भी मुस्कुरा कर और अपनी मनमोहनी अदाओं से मानो इस इशारे को समझने का इशारा कर रही हो!
विधायक: “वैसे ठाकुर कितना देता है तुम्हे? महीने का?”
मालती: “जी???” मालती ने सवालिया नजरों से विधायक को देखा...
विधायक: “अरे मैं भी क्या पूछ रहा हू.... देती तो तू होगी ठाकुर को...” “हाहाहा” “क्यों कुछ गलत कहा मैंने?”
मालती: “जी आप भी न.... कुछ भी बोलते हैं.... मैं क्या दूँगी उन्हें.... काश कुछ दे सकती... वो तो ठाकुर जी ही हैं, उन्होंने सहारा दिया इनकी डेथ के बाद.... वरना मैं तो अकेली ही पड़ गई थी”
मालती की बात सुनकर विधायक इम्प्रेस हो गया... वो अभी तक उसने अभी तक केवल उसके जिस्म की खूबसूरती देखि थी,,,, मालती का दिमाग भी इतनी तेज़ चलता होगा .. ये नहीं सोचा था उसने...
विधायक: “हाहा.... वैसे तू पॉलिटिक्स में क्यों नहीं ट्राई करती... पूरे हुनर हैं तुझमे...”


मालती: “जी हम जैसों के लिए पॉलिटिक्स में जगह कहाँ... और अब फिर से मैं पॉलिटिक्स में नहीं जाना चाहती..”
विधायक: “फिर से? तू पहले कब पॉलिटिक्स में थी?”
मालती: “जी.... वो... मैं युनिवर्सिटी पॉलिटिक्स में काफी एक्टिव थी.... दो बार प्रेसिडेंट चुनी गई थी मैं”
मालती की कॉलेज की यादें आज फिर से ताजा हो गइ...वो रंगीन पल... वो पॉवर की भूख... जिसके लिए किसी के साथ सोने से भी परहेज नहीं होता था उसे...
विधायक: ”ओह.... प्रेसिडेंट साहिबा... हेहे... फिर छोड़ क्यों दी....पॉलिटिक्स? घर वालों ने शादी करवा दी? हाहा....”
मालती: “जी... वो कॉलेज ख़तम होते ही... शादी हो गई मेरी...”
विधायक: “अरे तो अब आजा... अभी देर कहाँ हुई है... और फिर कब तक किसी के एहसानों पे गुजर करेगी? पॉलिटिक्स में आके जनता की सेवा कर... स्वर्गीय मिश्रा जी को भी अच्छा लगेगा, कि उसके मरने के बाद उसकी बीवी जनता की सेवा कर रही है... और फिर तेरे बच्चे भी अब बड़े ही हो गए हैं...”
मालती: “हाहा... सपने दिखाना तो कोई आप लोगों से सीखे...”
विधायक: “अरे ये लल्लन सिंह फिजूल सपने नहीं दिखाता...” मालती के हाथो को दबाते हुए बोला- “परख है हमें...”
मालती: “अच्छा जी...”
विधायक: “जी हाँ...” और मालती के हाथों को अपने चंगुल से आजाद कर दिया और कुर्सी पे पीछे सहारा लेके आराम से बैठ गया...
मालती: “जी शुक्रिया... पर मैं अभी जहां हूँ वहाँ खुश हूँ....” अपने हाथ पीछे लेती हुई बोली....
“अरे कोई जल्दबाजी नहीं... पर हाँ सोचना जरूर इस बारे में...”
“अच्छा जी अब इजाजत दीजिये मुझे...अच्छा लगा आपसे मिल कर...” मालती कुर्सी ने उठते हुए बोली....
“हाँ हाँ....काफी समय हो गया है...निकलो अब तुम और उस बारे में जरा सोचना...अपने लिए नहीं तो स्वर्गीय मिश्रा जी की आत्मा के लिए...” लल्लन ने कहा
“जी जी.... सोचूंगी...” मालती मुस्कुराते हुए बोली...
“ये... मेरा पर्सनल नंबर रख लो... बेझिझक याद कर लेना” विधायक ने अपना कार्ड मालती की ओर बढ़ाया...
“ओह.... शुक्रिया....” और मालती ने कार्ड को अपनी पर्स में रखा... और अपना कार्ड निकाल कर विधायक को दिया.... “ये मेरा कार्ड... होटल में कभी किसी चीज की जरूरत हो... रूम, सूट,हाल,कैटरर्स,लॉन बुक कराना हो... पर्सनली मुझे फोन कीजियेगा...” मुस्कुराती हुई बोली....
“हाहा.... जरूर....सेवा का मौका तो जरुर देंगे हम” हँसते हुए विधायक ने कहा
और फिर मालती वहां से निकल ली.... विधायक दूर तक मालती की मटकती गांड को निहारता रहा... और फिर वो सीधे अपने अय्याश के अड्डे की ओर निकल लिया...अय्याश का अड्डा.... यानी उसका फार्म हॉउस...!


विधायक लल्लन सिंह ने मालती की दबी हुई आकान्च्छाओ को आज फिर से जगा दिया था... बचपन से वो पॉलिटिक्स में कुछ करना चाहती थी... कुछ बनना चाहती थी! बचपन से ही क्लास की मॉनिटर.. फिर स्कूल की हेड गर्ल और फिर कॉलेज की पॉलिटिक्स! सत्ता का नशा उसने चख रखा था... कॉलेज में अपने इसी नशे की वजह से न जाने कितनी बार चुदी थी वो... और हासिल ब्बहोत कुछ किया था उसने, सब अपने दिमाग और हुस्न से... कब दिमाग का प्रयोग करना है और कब अपने हुस्न का... ये मालती अच्छी तरह जानती थी!
अभी अभी संभली हुई जिन्दगी में वो अभी कोई रिस्क लेना नहीं चाहती थी... कोई भी डिसीजन लेने से पहले उसने ठाकुर की सलाह लेना ठीक समझा... इसी लिए उसने रात में 11.30 बजे ठाकुर को फोन मिलाया...
ठाकुर ने फोन उठाया....
“हाँ बोल मेरी जान....”
“उम्म्म.... कैसे हैं आप....” मालती ने सेक्सी आवाज में रिप्लाई किया
“इतनी रात में फोन करके पूछ रही है कैसा हूँ...जान लंड तड़प रहा है तेरे होंठो की नरम मसाज के लिए...”
“ओहो... आपको तो हमेशा बस.....” मालती ने शिकायती अंदाज में कहा
“और वहां मामला शांत हुआ या नहीं? विधायक जी जादा नाराज तो नहीं हो रहे थे?” ठाकुर ने प्यार से पूछा...
“अरे नहीं नहीं.... वो तो उनका वो आदमी जो आया था क्या नाम था उसका... हाँ अफरोज़.. वो अकडू था... विधायक जी तो आराम से बात कर रहे थे... और फिर मैंने माफ़ी भी तो मांग ली उनसे....”
“फिर ठीक है... वरना साली आज तो तूने फालतू का नुक्सान करा दिया... सजा तो मिलेगी तुझे... मिल तू अगली बार..”
“ओह ठाकुर जी.... मैं भी कब से तड़प रही हू मिलने को...बिस्तर पे बहोत मिस करती हूँ आपको”
“अच्छा......”
“जी हाँ ...”
“वैसे तू साली बिना लंड के ज़िंदा कैसे रहती होगी... कहीं.... मेरी पीठ पीछे....??”
“छी-छी... मर जावां मै.... आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं...आपकी हूँ मैं सिर्फ... और मेरी फुद्दी पे भी सिर्फ आपका हक है...”
“हाँ मेरी रांड.... सोचना भी मत ऐसा करने का... वरना साली भरे बाजार में चुद्वाऊंगा जंगली सांड से...”
“हीही.... सजा देने की बात कर रहे हैं या मजा....”
“हाहा... रांड साली.... कित्ती बड़ी वाली है तू...”
“चलिए न... बड़ा तो आपका है... मैं तो बस...”
“हाहाहा.... साली..... वैसे कोई दिक्कत तो नहीं है न तुझे वहाँ?”
“नहीं नहीं.... और फिर आप हैं न दिक्कत से बचाने के लिए...”
“हा..जानेमन... मैं तो हूँ ही... वैसे तू होटल के काम में अपना फिजूल का दिमाग मत लगाया कर... वहां स्टाफ सब संभाल लेगा... ख़ास ट्रेंड लोग हैं काम के लिए...तू बस ओफ्फिस में बैठा कर और आराम करा कर.”
“जी समझ गई... वो अकाउंटेंट ने मुझे बोला था आज सुबह पैसो के लिए... वो तो मैं भी बेवजह उलझ गई..”
“हाँ हाँ... अब ठीक है... वैसे दुबारा ऐसी गलती मत करना...”
“जी नहीं होगी... पिंकी प्रोमिस”
“हाहा... पिंकी प्रोमिस... साली.... तेरी पिंकी जब मेरा कालू चोदेगा न... तब पता चलेगा तुझे”
“आग मत लगाइए ....”
“हाहा....” ठाकुर हंसा
“वैसे कितना अच्छा होता अगर आप विधायक होते...”
“अरे मेरी जान... मैं क्या किसी विधायक से कम हूँ”...” ठाकुर ने धमक के साथ कहा!
“उम्म्म.... वैसे मैं सोच रही थी कि पॉलिटिक्स ज्वाइन कर लूं... थोड़ी सोशल सर्विस ही हो जायेगी इसी बहाने..”
“हाहा.. वैसे आइडिया बुरा नहीं है... पर साली... अगर तू पॉलिटिक्स ज्वाइन कर ली तो मेरा होटल कौन संभालेगा?”
“ओहो... ठाकुर जी... वैसे भी मैं दिन भर यहाँ बैठी बैठी बोर होती रहती हूँ... और फिर आपका होटल संभालने के लिए आपके वो.. ट्रेंड एम्प्लोयी हैं न...” मालती ने शिकायत करते हुए कहा...
“अरे तू सीरियस है क्या...?”
“और क्या मजाक कर रही हूँ ?”
“साली.... रांड... वैसे तू परफेक्ट है पॉलिटिक्स के लिए... बेबस विधवा नारी.... हाहा..”
“ओहो... आप भी न... आपको तो हर समय मजाक सूझता है..”
“साली मजाक नहीं... तेरी औकात बता रहा हूँ...औकात! दो टके की है नइ है... पॉलिटिक्स में जायेगी... साली तेरा काला चिट्ठा जनता को पता चलेगा तो पता है न... क्या होगा.... साली कहीं की नहीं रहेगी...” ठाकुर ने हनक के साथ एक सांस में मालती को हड़काते हुए कहा...
“उम्म्म.... किसे पता है मेरा काला चिठा? आपको... और वो क्या केवल मेरा काला चिट्ठा है? आपका नहीं? हाँ सारा दोष औरत का ही तो होता है... मैंने ही आपको नहीं रोका था... अपने पेटीकोट का नारा खीचते वक्त!”
“जवान लड़ा रही है साली.... दो टके की रांड.... भूल गई... तू... साली... भूल गई? अगर मैं न होता तो चुद रही होती अभी किसी रंडी खाने में.... रमीज के दोस्तों से...”
मालती को अपनी औकात और मजबूरियां याद आने में जादा देर नहीं लगी.... और उसने अपना बर्ताव थोड़ा नरम किया...
“उम्म्म... श......” मालती सुबकने लगी..... आँख से आंसू आ गए उसके....
“रो क्यों रही है.... मार खाएगी क्या? भेजूं अभी चोदने के लिए किसी को? साली रोना बंद कर.... रांड है तू मेरी... और मेरी रंडियां रोती नहीं..”
“उम्म्म.... अच्छा जी नहीं रो रही....”
“साली...”
“वो मैं तो ये बोल रही थी... कि अगर मैं पोलिटिक्स ज्वाइन करती हूँ तो उससे आपका ही फायदा होगा... और फिर विधायक जी ने खुद मुझे इनवाईट किया है पॉलिटिक्स ज्वाइन करने के लिए”
“ठरकी है वो एक नंबर का...”
“आप भी तो हो”
“हाहा... साली.... चल ठीक है... सोजा अब... कल बताता हूँ मैं तुझे!”
और फिर ठाकुर ने फोन काट दिया...
मालती के पॉलिटिक्स में जाने से ठाकुर को अपने फायदे साफ़ दिख रहे थे... बस उसे डर था कि कहीं चिड़िया पिंजड़े से निकल न जाए... पर वो भी पक्का खिलाड़ी था... मालती जैसी 2-4 और पाल रखीं थी उसने... और फिर ठाकुर जानता था कि चिड़िया भी पिंजड़े से निकलने के पहले 10 बार सोंचेगी!
आज सुबह से ही मालती को ठाकुर के फोन का इंतज़ार था.... उसे इंतज़ार था ठाकुर के निर्णय का... ठाकुर को पता था कि हुनर और हुस्न.. दोनों मामलों में मालती का कोई जवाब नहीं... और अब मालती खुद को ठाकुर की रखैल मान ही चुकी थी तो उसे भी उसके पॉलिटिक्स के प्रति झुकाव से कोई दिक्कत नहीं थी... और फिर मालती के पॉलिटिक्स ज्वाइन करने से फायदा भी तो ठाकुर का ही था...
और फिर परमीशन मांग के मालती ने ठाकुर का दिल और विश्वास दोनों जीत लिए थे...
ठाकुर ने मालती को फोन किया और समझाते हुए उसे इजाज़त दे दी... और साथ में एक दो मर्दानगी भरे वादे भी! मालती बहोत खुश थी... मानो उसे उसकी जिन्दगी मिल गई हो... चेहरे की चमक देखते ही बन रही थी! उसे समझ नहीं आ रहा था कि ठाकुर का कैसे शुक्रिया करे!
उधर दूसरी ओर उसकी बेटी मानसी, उसकी जवानी का ताला भी राका ने तोड़ दिया था... वो राका की बाहों में कब सो गई उसे खुद पता नहीं चला.... सुबह उसने फुटबाल मैच में राका का स्टैमिना देखा था... और अब वो स्टेमिना उसने अपनी चूत में महसूस किया था... अपने मुह में महसूस किया था... उसके लंड की नसों को उसने अपने कोमल लिप्स से महसूस किया था.... राका तो मानो जन्नत में था... एक पैर उसने मानसी की जांघो के बीच डाल रखा था और उसकी एक बांह मानसी को अपने सीने से जकड़े हुए थी.... दोनों बेसुध एक दूसरे की गर्मी का आनंद लेते हुए सो रहे थे... बीच में मानसी की आँख खुली भी... पर खुद को राका के जिस्म से लिपटा पा कर फिर से उसी पोजीशन में कोज़ी हो गई... दोनों जब सांस लेते तो मानसी के बूब्स दब जाते.... और फिर दोनों एक दूसरे पे अपनी गरम साँसे छोड़ देते... मानसी पहली बार किसी मर्द के साथ सो रही थी...
रिषभ शाम को वापस आया... उसने अपनी चाबी से फ्लैट का लॉक खोला और अन्दर आ गया..... ड्राइंग रूम में लड़की के कपड़े बिखरे देख कर उसकी आँखे चमक उठीं... उसने वहां पड़ी मानसी की ड्रेस को उठाया और अपनी नाक के पास ले जा कर उसे सूंघा... जसप्रीत... ओह... तो आज जस्सो रानी के अकेले अकेले मजे ले रहा है साला...(मानसी ने भी वही परफ्यूम लगा रखा था जो जस्सो लगाती थी)! वो भी कम हरामी नहीं था... तुरंत बेडरूम में जा घुसा.. और बेड पर कूद गया... और राका को मानसी के ऊपर से हटाया.... मानसी तो पहले से जग रही थी.... वो रिषभ को बेड पे देख के चीख पड़ी...... “आआआआआआउ...... heeyyyyyyyyy......whoo are yoo...... ...” और चिल्लाते हुए राका के पीछे हो गई और चादर अपने ऊपर खींच ली!
“साले तू..... नॉक नहीं कर सकता था.... बाहर निकल अभी..... यार...” राका थोड़ा गुस्से में बोला...
“चिल्ल यार... मेरे को लगा कि....”
“साले रिषभ.... तू भी न....”
मानसी ने अपना चेहरा राका के पीछे छुपा रखा था.... रिषभ ने इशारों में राका से पूछा...”कौन है”... और राका ने भी उसे इशारों में ही समझा दिया.... और फिर रिषभ “सॉरी” बोलता हुआ रूम से निकल गया... और रूम का डोर भी लगा गया...!
रिषभ के जाते ही मानसी ने अपना सर राका के सीने में छुपा लिया.....
“इट्स ओके डार्लिंग... बेस्ट फ्रेंड है मेरा वो.... आई होप तुम्हे बुरा नहीं लगा होगा...” राका ने प्यार से मानसी की नंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए कहा...
“बुरा???..... अरे डर गई थी मैं तो.... डरा दिया था तुम्हारे इस ‘बेस्टफ्रेंड’ ने मुझे...” मानसी थोड़ा नाटक करती हुई बोली...
“अरे मेरी जान... मेरे होते हुए डरने की बात...? अरे जान ले लूँगा तुझे डराने वाले की..” राका ने मानसी को अपनी ओर खींचते हुए कहा...
इस समय राका का लंड मानसी की बाईं जांघ से दब रहा था... और अब उसमे फिर से जान आने लगी थी...मानसी को उसकी चुभन महसूस होते ही शरम आ गई और उसने अपनी नज़रे नीचे झुका ली...राका के तुरंत पोजीशन बदली... अब मानसी अब उसके नीचे थी... वो उसके कंधो को... गले को... कान... चेहरा..हर जजः चूम रहा था... और मानसी किसी कमसिन कलि की तरह बिस्तर पर लेटी अपने आशिक को सब करने दे रही थी...
“लोलीपॉप खाएगी....?” राका मानसी के कान में फुसफुसाया...
मानसी शर्मा गई... और हलके से मुस्कुराई.... और राका के गाल पर एक चुम्मी दे दी...
राका ने फिर पोजीशन बदली.... अब वो नीचे था और मानसी ऊपर... मानसी का मुह उसने दोनों हाथो से पकड़ कर अपने लंड के पास झुका दिया.... मानसी ने उसके लंड को अपनी जीभ बाहर निकाल कर चाटा... मानसी की इस हरकत ने राका के लंड की हालत खराब कर दी.... काला कोबरा अब फनफना रहा था... पूरे साढ़े सात इंच मानसी बार बार अपनी जीभ से नाप रही थी.... नीचे अन्डू तक जीभ फिराती हुई ले जाती और फिर ऊपर लंड के मुकुट तक आती... राका के लंड की फोरस्किन सरक चुकी थी... उसके लंड का अगला भाग छिली हुई लीची जैसे चमक रहा था... और बाकी लंड काला कठोर! राका की हालत खराब हो रही थी... और मानसी की जुल्फें.... जो राका के पेट और जांघ पर बार बार आ रही थीं... वो उसकी हालत और खराब कर रही थी... अबकी बार मानसी के कोमल होंटों ने राका की लीची को अपने चंगुल में लिया तो उसके मुह से आह निकल गई... राका की आह ने मानसी के चेहरे पे मुस्कान बिखेर दी... उसकी जीभ अब फिर से राका के अन्डुओं को टीज़ कर रही थी... राका की बेचैनी उसे जवाब दे रही थी...
राका ने फिर पोजीशन बदली... अब वो मानसी के पीछे था... दोनों बेड पे लेटे थे.... मानसी राका के आगे थी...राका के बदन की गिरफ्त में.... राका दोनों हाथो से उसके बूब्स दबा रहा था... और अपना लंड उसकी गांड की दरार में फंसा कर हौले हौले से धक्के लगा रहा था.... “उम्म्म.... प्लीज्ज़... पीछे नहीं....” मानसी ने विनती की... राका मुस्कुराया और थोड़ा नीचे सरकटे हुए पीछे से ही लंड मानसी की चूत पे सटा दिया.... “जानू... आगे कर लूं??” राका मानसी को टीज़ करते हुए बोला... मानसी ने जैसे ही कुछ बोलने के लिए अपना मुह खोला...राका ने अपना राजकुमार मानसी की राजकुमारी के अन्दर ठांस दिया.... मानसी का मुह खुला का खुला रह गया... जैसे ही मानसी ने सांस ली... राका ने दूसरा झटका लगाया... राका ने मानसी को दबा रखा था अपने जिस्म से.... पूरा लंड अब अन्दर था..राका हौले हौले... प्यार से स्ट्रोक मार रहा था... मानसी भी प्यार भरी आंहे भर रही थी... मानसी को मस्ती में देख कर राका ने अपने स्ट्रोक्स की रफ़्तार बढ़ा दी.... अब वो मानसी की डीपली घुसेड़ के ले रहा था... और मानसी भी अपनी कमर हिला हिला के उसका ले रही थी.... सारे कमरे में मानसी की सिसकियाँ गूँज रही थी... और हिलते बेड की आवाज माहौल को और भी रंगीन कर रही थी!
राका ने उसे इसी पोजीशन में 20 मिनट तक चोदा... और फिर मानसी के अन्दर ही अपना प्रेमरस छोड़ दिया... मानसी भी झड गई...!
दोनों एक बार फिर निढाल होकर एक दूसरे की बाहों में पड़े थे...




क्रमशः ..............................
Nice Story
(08-06-2014, 11:13 PM)Rajsinha : [ -> ]Nice Story

Thanks
ये मानसी का पहला एक्सपीरियंस था... और पहले एक्सपीरियंस में ही राका ने उसे जन्नत का एहसास दिला दिया था... दोनों एक दूसरे में इतने मस्त हो गए थे कि समय का पता ही नहीं चला... रात के नौ बज रहे थे... राका और मानसी अभी भी एक दूसरे की बाहों में पड़े मस्ती कर रहे थे... एक दूसरे के जिस्म की गर्मी का मजा ले रहे थे....
“साले डिनर नहीं करना?” रिषभ चिल्लाते हुए बोला....
राका थोड़ा होश में आया और फोन में टाइम देखा... “ओ तेरी.. 9.30 हो गया...”
“व्हाट??? 9.30.. ओ माय गॉड... मैं तो गई काम से...” मानसी परेशान होती हुई उठी...
“क्या हुआ जान...” राका ने मानसी के चेहरे से जुल्फें हटाते हुए प्यार से पूछा
“पीजी में 9 बजे तक एंट्री होती है यार... अब मैं क्या करू... और अगर मैं अनहि पहुची तो वो कमीनी वार्डन घर में मम्मी को फोन कर देगी” मानसी परेशान होती हुई बोली...
“ओह मेरी जान... अभी चल मैं छोड़ देता हूँ चलके... बोल देना ट्रैफिक में फंस गई थी...” राका ने कूल वे में कहा...
“पागल हो गए हो क्या... जानते नइ हो तुम मेरी वार्डन को... एक नंबर की चुड़ैल है... इस समय तुम्हारे साथ देखा उसने मुझे तो पक्का घर फोन करके उल्टा सीधा बोलेगी मम्मी को...”
“फिर तू मम्मी को ही फोन करके क्यों नहीं बोल देती कि तू आज पीजी वापस नहीं जायेगी... फ्रेंड के यहाँ रुकी है...” राका आईडिया देता है...
“वाव..राका... ये आईडिया मेरे दिमाग में क्यों नहीं आया... योर सो जीनियस....” राका के गाल को एक्साइटमेंट में किस करती हुई बोली...
“अब फोन कर और प्रॉब्लम सोल्व कर जल्दी.. वरना तेरी वो चुड़ैल वार्डन तेरी माँ चोद देगी..” राका मानसी का एक बूब दबाता हुआ मस्ती में बोला...
“शट अप..राका..” मानसी राका से थोड़ी नाराजगी जताती है.... जिसे राका मजाक में टाल देता है..
फिर मानसी फोन उठाती है और पहले वार्डन को फोन करती है... और उसे बताती है कि वो आज रात नहीं आ पायेगी.. और फिर अपनी माँ को फोन करती है.. और उन्हें भी बता देती है...कि वो एक फ्रेंड के यहाँ रुकी हुई है!
“ओह डार्लिंग... भूख लगी है मेको....” मानसी राका की आँखों में झांकते हुए प्यार से बोली...
“उम्म्म.... भूख तो मुझे भी लगी है मेरी जान...” राका आँख मरते हुए बोला... और मानसी को अपने पास खींच कर दबोच लिया...
“ओहो... प्लीज़.... अभी नहीं...” मानसी रिक्वेस्ट करती है....
राका अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करता है... और प्यार से पूछता है....
”क्या खाएगी? कहीं बाहर चलें? या आर्डर करना है?”
“उम्म्म.... पिज़्ज़ा? पिज़्ज़ा आर्डर करें”
“एनीथिंग बेबी....” राका बोला...
“उम्म्म... तो फिर पिज़्ज़ा ही आर्डर कर दो... 1 लार्ज... फार्महाउस चीज़बर्स्ट” मानसी बोली
“एक लार्ज... चीज़ बर्स्ट.... ओय.. वैसे आज तो दिन में दो बार खा चुकी है तू ये.... अब फिर से??” मानसी को टीज़ करता हुआ राका बोला... और उसका हाथ अपने लंड पे रख देता है...
“कितने नॉटी हो तुम...” मानसी आँखे मटकाते हुए बोली... और उसके लंड से हाथ हटा लिया...
दोनों की मस्ती ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रही थी...
इतने में रिषभ फिर से बाहर से चिल्लाते हुए बोला...
“BC.. डिनर नहीं करना क्या तुम दोनों को? फिर रात में मेरे अंडे मत खा जाना...”
“चल साले... मैं क्यों खाऊंगा तेरे अंडे? और ये.. ये तो मेरे खाएगी... तेरे क्यों खाएगी?” राका चिल्लाते हुए बोला.. और बिस्तर से उठ के शॉर्ट्स पहने...
“पिज़्ज़ा खायेगा?” राका ने बहार आके रिषभ से पूछा...
“एक लार्ज.. फार्महाउस... चीज़ बर्स्ट...” रिषभ राका को चिढ़ाते हुए बोला..
“साले BC.. तू नहीं सुधरेगा...” राका पानी पीते हुए बोला...
“वैसे कांग्रेट्स यार...”
“थैंक यू थैंक यू.. और चल आर्डर कर दे पिज़्ज़ा...”
“कौन सा?... लार्ज... चीज़ बर्स्..........” रिषभ फिर से राका को टीज़ करता है
“साले.....”
इतने में मानसी बाहर आ जाती है...
उसने राका की टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन लिए थे... जो कि काफी लूज़ हो रहे थे उसे.. पर हमेशा की तरह माल लग रही थी.. बालों की हालत और उसकी चाल को देखकर कोई भी बता सकता था कि अभी कुछ देर पहले वो क्या गुल खिला रही थी...
“ओह... हाय मानसी....” रिषभ आगे आके मानसी से हाथ मिलाता है और उसकी कोमलता को महसूस करता है!
“मानसी... ये रिषभ.. मेरा बेस्ट फ्रेंड... या यूं कहो तो मेरा भाई...” राका इंट्रोड्यूस कराते हुए बोला..
“ओह... हेलो रिषभ...” स्माइल करती हुई बोलती है...
“आई होप यू बोथ हैड वंडरफुल डे टुडे....” राका दोनों को टीज़ करता हुआ बोला...
मानसी शर्मा गई.. और राका मानसी के बगल में आके बोला “ऑफ़कोर्स वी हैड”


फिर रिषभ ने फोन उठाया और पिज़्ज़ा आर्डर कर दिया- “2 लार्ज फार्महाउस... चीज़ बर्स्ट”. आर्डर देते समय उसने “2” पर कुछ जादा ही जोर लगाया... और उस समय वो मानसी को ही देख रहा था... मानसी को समझने में देर नहीं लगी कि रिषभ क्या कहना चाहता है..उसने भी एक हलकी सी स्माइल दी और राका के बगल में आके बैठ गई!


20 मिनट में पिज़्ज़ा आ गया...
फर्जी बकचोदी करते हुए तीनो ने डिनर किया... और फिर राका मानसी को लेकर वापस बेडरूम में आ गया...
“आल द बेस्ट मेरे दोस्त...” रिषभ बाहर से चिल्लाया!
राका ने स्माइल करते हुए दरवाजा अन्दर से लॉक कर लिया!
“कमीना है साला.. माइंड मत करना इसकी बातों को...” राका मुस्कुराते हुए मानसी से बोला
“ओहो.. डार्लिंग... फ्रेंड्स तो होते ही कमीने हैं... और जो कमीने नहीं होते वो फ्रेंड्स नहीं होते” स्माइल करती हुई मानसी बोली
“ओये होए.... क्या बात है...लव यू जान... लव यू लाइक एनीथिंग” मानसी के बगल में आते हुए राका ने कहा...
“लव यू टू राकू...डार्लिंग....”
“राइड पे चलें?” राका आँख मारते हुए बोला..
“लॉन्ग राइड पे?” मासूमियत के साथ मानसी ने पूछा...
“हां मेरी जान.... लॉन्ग....लॉन्ग राइड पे....”
राका का लंड तन चुका था... और मानसी अपनी जांघ पर उसकी कड़कता को महसूस भी कर रही थी...
अपनी जांघ को हटाते हुए बोली- “पर एक शर्त है... राइड मैं करूंगी....”
राका मुस्कुराया... और बेड पे चित होके टाँगे पसार के लेट गया....
हाथ बढ़ाके बेड के गद्दे के नीचे से एक कंडोम का पैकेट निकाला.... और मानसी को थमा दिया...
“ये क्या है?” मानसी पहली बार कंडोम देख रही थी...
“जानू... ये हेलमेट है तेरे केले का... ये मेरी चीज़ को तेरी चूत में बर्स्ट होने से बचाता है...”
मानसी शर्मा गई.... उसे वो पिज़्ज़ा वाली बात फिर से याद आ गई...
इसी बीच राका ने अपने शॉर्ट्स उतार कर फेंक दिए...
“ओ माई गॉड.... पहले क्यों नी लगाया था इसे..” परेशान होती हुई बोली
“अरे मेरी जान... कल मोर्निंग में पिल्स ले लेना... टेंशन की कोई बात नहीं है..”
“पर.....”
“अरे पर वर छोड़ न अब...” और राका ने उसे अपने ऊपर खींच लिया और अपनी जीभ उसके मुह में घुसा दी...
अगले ही पल दोनों एक दूसरे को मगन हो कर चूम रहे थे.... मानसी को गरम होते देर नहीं लगी... फिर से दोनों एक दूसरे में खो चुके थे.... चूमते हुए ही राका ने मानसी के शॉर्ट्स भी नीचे सरका दिए और टी शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उसके कोमल बूब्स को मसल रहा था....
मानसी की चूत अब उसे जवाब दे रही थी... उससे और सब्र नहीं हुआ... और उसने चुम्बन तोड़ा और नीचे अपने खिलौने के पास आ गई... उसे अपने हाथो से थोड़ा टीज़ किया... और किस किया...
राका ने कंडोम का पैकेट खोल कर कंडोम मानसी को थमा दिया....
मानसी कंडोम को हाथ में लेकर देख रही थी.... उसे नहीं पता था कि इसे कैसे लगाना है.... राका ने फट से उसके हाथ से कंडोम लिया और अपने लंड की टिप पर रख कर उसे नीचे तक रोल ऑफ किया...
“इट्स रेडी मेरी जान.... राइड ओवर इट!!!...”
मानसी की बेचैनी और चूत की प्यास ने उसे तुरंत लंड पर बैठा दिया....
लंड पूरा उसकी चूत में सरक चुका था... वो वैसे ही बैठ कर हौले हौले अपनी गांड हिला रही थी... उसके चुत्तड जब राका के जिस्म से रगड़ खाते तो उसे और भी मजा आता... मानसी जब उछल उछल कर चुदती तो राका के अन्डू उसके गांड के छेद में लगते.... इसी पोज़ में मानसी ने राका के लंड को अपनी चूत के कोने कोने से रगड़ाया... पंद्रह मिनट तक राइड करती रही... फिर राका ने उसे अपने नीचे ले लिया... और मिशनरी में उसे चोदा और झड़ गया... मानसी तीसरी बार चुदी थी... पर उसका मन नहीं भरा था... पर वो अपने मन को खुल कर बताने में शर्मा भी रही थी...राका भी अपनी नइ माल को जादा तंग करना नहीं चाह रहा था... वैसे भी कौन सा कहीं भागी जा रही थी वो... सुबह का फुटबाल मैच.. और फिर तीन बार की चुदाई...इन सबने उसे आज थोड़ा थका भी दिया था... दोनों बारी बारी बाथरूम गए... खुद को थोड़ा फ्रेश किया... और वापस एक दूसरे की बाहों में सो गए!
उधर ठाकुर की परमीशन मिलने के बाद मालती की ख़ुशी छुपाये नहीं छुप रही थी...उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ठाकुर ने हाँ कह दी है... अब वो खुद पे गर्व महसूस कर रही थी...काफी लम्बे समय के बाद वो फिर से राजनीति में कदम रखने जा रही थी! कॉलेज की राजनीति नहीं असल जिन्दगी की राजनीति में! एक हाथ में मोबाइल था और दूसरे हाथ में विधायक लल्लन सिंह का विजिटिंग कार्ड और चेहरे पर ख़ुशी! बार बार मोबाइल पर नंबर टाइप करती और फिर न जाने क्या सोच कर नंबर हटा देती!
मालती ने आखिरकार अपनी कशमकश को काबू में करते हुए फोन किया... फोन लल्लन सिंह की सेक्रेटरी ने उठाया! मालती ने खुद का परिचय दिया और अपॉइंटमेंट के लिए रिक्वेस्ट की!
“जी विधायक जी आज फ्री नहीं हैं... आज मुलाक़ात नहीं हो पायेगी आपकी उनसे” सेक्रेटरी बोली!
“अरे आप एक बार उनसे बताइये तो कि मैं मिलना चाहती हूँ...”
“अरे बोला न... समझ में नहीं आता आपको एक बार में? नहीं हो पायेगी आज मुलाकात” सेक्रेटरी थोड़ा झल्लाती हुई बोली!
“अरे रूपा... क्या हुआ... कौन परेशान कर रहा है तुम्हे?” पास में बैठे अफ़रोज ने सेक्रेटरी रूपा से पूछा!
“अरे अफ़रोज... कोई नहीं यार... लोग भी न... एक बार में समझ नहीं आती बात”
सेक्रेटरी अफरोज से थोड़ा थकी हुई आवाज में बोली...
“ला... मैं समझाता हूँ....” अफ़रोज उठ कर रूपा के पास आता है!
“ज़रा आराम से....” रूपा स्माइल देती हुई बोली और अफरोज को फ़ोन थमा दिया!
“हेलो... हाँ भाई एक बार में समझ में नहीं आता कि आज नहीं मिलेंगे विधायक जी” अफरोज थोड़ा हड्काता हुआ बोला!
“अरे अफरोज.. मैं मालती.... वो परसों शाम को आई थी विधायक जी से मिलने... वो ....” मालती थोड़ा समझाती हुई बोली
“ओह तो आप हैं मोहतरमा... कहिये अब क्या समस्या आ गई...”
“जी वो लल्लन सिंह जी से मिलना था... कुछ जरूरी काम था... अगर अपॉइंटमेंट मिल जाता तो..... प्लीज़.....” मालती सेक्सी टोन में रिक्वेस्ट करती है!
“जी वैसे तो विधायक जी आज किसी से मिलते नहीं हैं... पर अब आप इतना कह रही हैं तो मैं उनसे एक बार पूछ लेता हूँ!”
“ओह थैंक यू वैरी मच अफरोज...”
फिर अफरोज ने फोन काट दिया!
करीब 5 मिनट बाद मालती के फोन में एक अननोन नंबर से फोन आया...
“हेल्लो...” मालती फ़ोन उठाती है
“हाँ मैडम...मैं अफरोज...”
“हाँ अफरोज... क्या हुआ.... फ्री हैं विधायक जी?”
“हां... पर वो आज ऑफिस नहीं आते... अगर आपका मिलना इतना ही जरूरी है तो सिटी क्लब में दो बजे मिल सकती हैं!”
“ओह थैंक यू सो मच... मैं वहीँ मिल लूंगी... और फिर सिटी क्लब मेरे होटल के पास में भी है!”
“मैं उनके ड्राइवर का नंबर आपको अभी सेंड कर देता हूँ... वहाँ पहुच के उसे फोन कर लेना... वो आपकी मुलाक़ात करवा देगा!” अफरोज बोला...
“ओके... थैंक्स!” और फिर मालती ने फोन काट दिया!


“ओहो... कैसे कैसे लोग होते हैं.. और इन वीआईपी लोगों का तो अलग ही ड्रामा रहता है... उस दिन बोल रहे थे पर्सनल नंबर है... और नंबर था ओफिस का.. और अभी... मुझे डायरेक्ट लल्लन जी का नंबर नहीं दे सकता था क्या ये? ड्राईवर को फोन कर लेना... वो मिलवा देगा... हुह...” मालती मन में बडबडा रही थी और इस सबसे वो इम्प्रेस भी हो रही थी...
फिर अफरोज का भेजा नंबर उसने अपने फोन पर सेव किया... और फिर प्रिया को बोल कर होटल से निकल ली... सजने के लिए उसके पास 2 घंटे का समय था...
और उसने इस समय का भरपूर प्रयोग किया...
बगलों और झांटों के बाल साफ़ करने के बाद करीब आधा घंटा बाथ टब में उसने बिताये! वो बाथ टब में लेटी लेटी सोच रही थी कि क्या पहने? फिर शायद जब उसने डिसाइड कर लिया कि आज वो क्या पहनेगी.. फिर वो बाथटब से बाहर निकली.... निकल कर बाथरोब लपेटा... और पूरे जिस्म को सुखाया...
सफ़ेद पैडेड ब्रा... और नीचे ब्लैक पैंटी! उसके ऊपर सफ़ेद कॉटन की कुर्ती जिसमे सफ़ेद धागों से ही कढ़ाई थी.. और जिसके ऊपर से उसकी सफ़ेद ब्रा भी झलक रही थी... और नीचे लाल चूड़ीदार पैजामी... और ऊपर लाल दुपट्टा! बाल उसने पहले बांधे... फिर न जाने क्या सोंच कर उन्हें खुला ही छोड़ दिया... हाथो में लाल नेलपोलिश उसे और भी सुन्दर बना रही थी!
फिर उसने घड़ी देखी और सिटी क्लब को निकल ली!
सिटी क्लब पहुच कर अपनी कार पार्क की और ड्राईवर को फोन मिलाया! ड्राईवर उसे विधायक के पास लेकर गया!
“ओहो.... आइये आइये.... मोहतरमा....” मालती को ऊपर से नीचे तक ताड़ते हुए अपने चिरपरचित अंदाज में उसने मालती का स्वागत किया
“नमस्ते सर.... मेरे लिए समय निकालने के लिए शुक्रिया” मालती मुस्कुराती हुई बोली...
दोनों इस समय क्लब के प्राइवेट लाउंज में थे... दो काउच आमने सामने पड़े थे और बीच में एक मेज... हलकी नीली और लाल रौशनी माहौल को रंगीन करने की कोशिश कर रही थी!
विधायक बैठा और मालती को भी बैठने को बोला...
दोनों आमने सामने बैठे थे...
“हाँ तो मोहतरमा... कैसे आना हुआ....”
“क्यों... नहीं मिल सकती? आपने ही तो बोला था उस दिन... और फिर आपने मुझे अपना नंबर भी दिया था.. पर जब मिलाया तो वो आपके ऑफिस का निकला...” मालती थोड़े शिकायती अंदाज में बोले जा रही थी... और विधायक उसकी इस अदा के धीरे धीरे मुस्कुरा कर मजे ले रहा था...
“...और मेरा नाम मोहतरमा नहीं... मालती है..”
“हाहाहा... अच्छा तो मालती जी... अब हमें माफ़ भी कर दीजिये....” विधायक थोड़ा हँसते हुए मालती की चुटकी लेता हुआ बोला...
“ओहो कैसी बात कर रहे हैं आप... शर्मिंदा मत करिए लल्लन जी...”
विधायक मुस्कुरा रहा था... और मालती की खूबसूरती से अपनी आँखे सेंक रहा था...
“उम्.... उस दिन आपने मुझे पॉलिटिक्स ज्वाइन करने की सलाह दी थी... लल्लन जी...मैंने काफी सोचा.... और फिर रोक नहीं पाई खुद को...” मालती मुस्कुराती हुई बोली...
मालती की बात सुनकर लल्लन की आँखे चमक गईं... वो खुद को रोक नहीं पाया और अपने काउच से उठ कर मालती के बगल में पड़ी खाली जगह में आकर बैठ गया....
“अरे ये तो अच्छी बात है... तुम जैसी औरतों को तो राजनीति में बढ़ चढ़ कर भाग लेना चाहिए.... मैं तुम्हारे डिसीजन का स्वागत करता हूँ...”
“ओह थैंक यू..लल्लन जी... आपने मुझे मोटिवेट किया... वरना मैं तो इस बारे में कभी सोचती ही नहीं...”
“अरे थैंक यू.. वैंक यू छोड़िये मालती जी... अब ये बताइये क्या लेंगी आप? कुछ सॉफ्ट या हार्ड? वैसे इस मौके पर तो हार्ड ही ठीक बैठेगा...” लल्लन ने मालती का हाथ पकड़ते हुए कहा...
मालती मुस्कुराई... और अपना दूसरा हाथ लल्लन के हाथ के ऊपर रख के बोली...
“दिन में हार्ड नहीं लेती लल्लन जी... सॉफ्ट ही ठीक रहेगा अभी...”
“हाहा... चलिए फिर... आपकी जैसी मर्जी...”
वो काउच पे पास लगी बटन को दबाता है.... कुछ देर बाद वेटर आता है... विधायक उसे आर्डर देता है....
अगले ही पल... मालती के हाथ में कोक और लल्लन के हाथ में व्हिस्की स्कॉच थी!
“वैसे आप ड्रिंक तो करती होंगी न....”
“जी कभी कभी...”
“तो आज वो कभी नहीं हो सकता...?” विधायक ने सवाल किया...
मालती विधायक को कोई उल्टा जवाब नहीं देना चाहती थी... इसलिए उसने कहा...
“अच्छा ठीक है... पर बिलकुल थोड़ी सी....”
“हाहाहा... हाँ अब हुई न बात....” और उसने अपना गिलास ही मालती की ओर बढ़ा दिया...
मालती ने मुस्कुराते हुए उसके गिलास से एक सिप ली....
“हाँ.. तो आप कल सुबह आ जाइये पार्टी ऑफिस... पार्टी की मेम्बरशिप के लिए” विधायक ने कहा...
“जी....” मालती ने धीरे से जवाब दिया!
“तुम्हारे लिए ख़ास जगह सोची है हमने...कल पार्टी ऑफिस में मिलो.. सब समझाता हूँ तुम्हे”
“ओह... शुक्रिया लल्लन जी...”
एक हाथ से वो मालती के एक हाथ को सहला रहा था... और उसकी नजरें... मालती के उरोजों के बीच की खाई में झाँकने से खुद को रोक नहीं पा रही थी...
“मालती... देखो... राजनीती आसान नहीं है.... इसमें बहुत कुछ खोना पड़ता है...” मालती की बाईं जांघ पर हाथ रखते हुए वो बोला...
“कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना ही पड़ता है लल्लन जी... अब कुछ खोके फिर जो संतुष्टि मिलेगी... वो ही चाहिए मुझे... पैसे...प्रॉपर्टी तो ये छोड़कर गए हैं मेरे लिए”
“बस यही... यही चाहिए होता है... एक अच्छा नेता बनने के लिए....तुम बहुत आगे जाओगी मालती” जांघ को सहलाते हुए बोला
“थैंक यू लल्लन जी....” मुस्कुराते हुए वो बोली...और लल्लन के हाथ में अपना हाथ रख दिया!
विधायक ने उसके हाथ रखते ही मालती की जांघ को मानो मसल ही दिया...
वो खुद पर काबू रखता है... क्योंकि वो जानता है कि जल्दबाजी का काम हमेशा खराब होता है... और फिर औरत के मामले में कदम संभल कर ही उठाना चाहिए!
उसने खुद को संभाला... और अपना हाथ मालती की जांघ से हटा लिया! और फिर मुस्कुराते हुए अपनी मुछों को ऊपर गोल उमेठा... और मालती के जिस्म पर ऊपर से नीचे एक सरसरी निगाह फेरते हुआ रुतबे में बोला...
“अच्छा तो मालती...तुम कल सुबह मेरे ऑफिस में मिलो... सुबह नौ बजे..”
वो उठा... मानो इशारा कर रहा हो कि मीटिंग का समय ख़तम हो गया है...
मालती का उठने का मन तो नहीं हो रहा था... पर वो इशारे को समझी और उठी..
विधायक लल्लन सिंह से हाथ मिलाया... और फिर इजाज़त लेके वहां से सीधे होटल आ गई!
आज विधायक की मर्दानगी ने उसके दिलो-दिमाग पे गहरा असर डाला था...
वो उन आँखों को भुला नहीं पा रही थी.. वो विधायक का अपनी मुछे बार बार ऊपर उमेठना... वो चोरी छिपे उसके जिस्म पे नजरें डालना.. और फिर वो... जब लल्लन जी ने उसकी जांघ को मसल ही दिया था... उसके दिमाग में बार बार वो सब बातें आ रही थी! वो मुस्कुरा रही थी!
“विधायक जी मुझे पार्टी में कौन सी जगह देंगे... किस स्पेशल जगह की बात कर रहे थे वो....” वो सोच रही थी... कयास लगा रही थी.. एक्साईटेड हो रही थी!




उधर ठाकुर की परमीशन मिलने के बाद मालती की ख़ुशी छुपाये नहीं छुप रही थी...उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ठाकुर ने हाँ कह दी है... अब वो खुद पे गर्व महसूस कर रही थी...काफी लम्बे समय के बाद वो फिर से राजनीति में कदम रखने जा रही थी! कॉलेज की राजनीति नहीं असल जिन्दगी की राजनीति में! एक हाथ में मोबाइल था और दूसरे हाथ में विधायक लल्लन सिंह का विजिटिंग कार्ड और चेहरे पर ख़ुशी! बार बार मोबाइल पर नंबर टाइप करती और फिर न जाने क्या सोच कर नंबर हटा देती!
मालती ने आखिरकार अपनी कशमकश को काबू में करते हुए फोन किया... फोन लल्लन सिंह की सेक्रेटरी ने उठाया! मालती ने खुद का परिचय दिया और अपॉइंटमेंट के लिए रिक्वेस्ट की!
“जी विधायक जी आज फ्री नहीं हैं... आज मुलाक़ात नहीं हो पायेगी आपकी उनसे” सेक्रेटरी बोली!
“अरे आप एक बार उनसे बताइये तो कि मैं मिलना चाहती हूँ...”
“अरे बोला न... समझ में नहीं आता आपको एक बार में? नहीं हो पायेगी आज मुलाकात” सेक्रेटरी थोड़ा झल्लाती हुई बोली!
“अरे रूपा... क्या हुआ... कौन परेशान कर रहा है तुम्हे?” पास में बैठे अफ़रोज ने सेक्रेटरी रूपा से पूछा!
“अरे अफ़रोज... कोई नहीं यार... लोग भी न... एक बार में समझ नहीं आती बात”
सेक्रेटरी अफरोज से थोड़ा थकी हुई आवाज में बोली...
“ला... मैं समझाता हूँ....” अफ़रोज उठ कर रूपा के पास आता है!
“ज़रा आराम से....” रूपा स्माइल देती हुई बोली और अफरोज को फ़ोन थमा दिया!
“हेलो... हाँ भाई एक बार में समझ में नहीं आता कि आज नहीं मिलेंगे विधायक जी” अफरोज थोड़ा हड्काता हुआ बोला!
“अरे अफरोज.. मैं मालती.... वो परसों शाम को आई थी विधायक जी से मिलने... वो ....” मालती थोड़ा समझाती हुई बोली
“ओह तो आप हैं मोहतरमा... कहिये अब क्या समस्या आ गई...”
“जी वो लल्लन सिंह जी से मिलना था... कुछ जरूरी काम था... अगर अपॉइंटमेंट मिल जाता तो..... प्लीज़.....” मालती सेक्सी टोन में रिक्वेस्ट करती है!
“जी वैसे तो विधायक जी आज किसी से मिलते नहीं हैं... पर अब आप इतना कह रही हैं तो मैं उनसे एक बार पूछ लेता हूँ!”
“ओह थैंक यू वैरी मच अफरोज...”
फिर अफरोज ने फोन काट दिया!
करीब 5 मिनट बाद मालती के फोन में एक अननोन नंबर से फोन आया...
“हेल्लो...” मालती फ़ोन उठाती है
“हाँ मैडम...मैं अफरोज...”
“हाँ अफरोज... क्या हुआ.... फ्री हैं विधायक जी?”
“हां... पर वो आज ऑफिस नहीं आते... अगर आपका मिलना इतना ही जरूरी है तो सिटी क्लब में दो बजे मिल सकती हैं!”
“ओह थैंक यू सो मच... मैं वहीँ मिल लूंगी... और फिर सिटी क्लब मेरे होटल के पास में भी है!”
“मैं उनके ड्राइवर का नंबर आपको अभी सेंड कर देता हूँ... वहाँ पहुच के उसे फोन कर लेना... वो आपकी मुलाक़ात करवा देगा!” अफरोज बोला...
“ओके... थैंक्स!” और फिर मालती ने फोन काट दिया!


“ओहो... कैसे कैसे लोग होते हैं.. और इन वीआईपी लोगों का तो अलग ही ड्रामा रहता है... उस दिन बोल रहे थे पर्सनल नंबर है... और नंबर था ओफिस का.. और अभी... मुझे डायरेक्ट लल्लन जी का नंबर नहीं दे सकता था क्या ये? ड्राईवर को फोन कर लेना... वो मिलवा देगा... हुह...” मालती मन में बडबडा रही थी और इस सबसे वो इम्प्रेस भी हो रही थी...
फिर अफरोज का भेजा नंबर उसने अपने फोन पर सेव किया... और फिर प्रिया को बोल कर होटल से निकल ली... सजने के लिए उसके पास 2 घंटे का समय था...
और उसने इस समय का भरपूर प्रयोग किया...
बगलों और झांटों के बाल साफ़ करने के बाद करीब आधा घंटा बाथ टब में उसने बिताये! वो बाथ टब में लेटी लेटी सोच रही थी कि क्या पहने? फिर शायद जब उसने डिसाइड कर लिया कि आज वो क्या पहनेगी.. फिर वो बाथटब से बाहर निकली.... निकल कर बाथरोब लपेटा... और पूरे जिस्म को सुखाया...
सफ़ेद पैडेड ब्रा... और नीचे ब्लैक पैंटी! उसके ऊपर सफ़ेद कॉटन की कुर्ती जिसमे सफ़ेद धागों से ही कढ़ाई थी.. और जिसके ऊपर से उसकी सफ़ेद ब्रा भी झलक रही थी... और नीचे लाल चूड़ीदार पैजामी... और ऊपर लाल दुपट्टा! बाल उसने पहले बांधे... फिर न जाने क्या सोंच कर उन्हें खुला ही छोड़ दिया... हाथो में लाल नेलपोलिश उसे और भी सुन्दर बना रही थी!
फिर उसने घड़ी देखी और सिटी क्लब को निकल ली!
सिटी क्लब पहुच कर अपनी कार पार्क की और ड्राईवर को फोन मिलाया! ड्राईवर उसे विधायक के पास लेकर गया!
“ओहो.... आइये आइये.... मोहतरमा....” मालती को ऊपर से नीचे तक ताड़ते हुए अपने चिरपरचित अंदाज में उसने मालती का स्वागत किया
“नमस्ते सर.... मेरे लिए समय निकालने के लिए शुक्रिया” मालती मुस्कुराती हुई बोली...
दोनों इस समय क्लब के प्राइवेट लाउंज में थे... दो काउच आमने सामने पड़े थे और बीच में एक मेज... हलकी नीली और लाल रौशनी माहौल को रंगीन करने की कोशिश कर रही थी!
विधायक बैठा और मालती को भी बैठने को बोला...
दोनों आमने सामने बैठे थे...
“हाँ तो मोहतरमा... कैसे आना हुआ....”
“क्यों... नहीं मिल सकती? आपने ही तो बोला था उस दिन... और फिर आपने मुझे अपना नंबर भी दिया था.. पर जब मिलाया तो वो आपके ऑफिस का निकला...” मालती थोड़े शिकायती अंदाज में बोले जा रही थी... और विधायक उसकी इस अदा के धीरे धीरे मुस्कुरा कर मजे ले रहा था...
“...और मेरा नाम मोहतरमा नहीं... मालती है..”
“हाहाहा... अच्छा तो मालती जी... अब हमें माफ़ भी कर दीजिये....” विधायक थोड़ा हँसते हुए मालती की चुटकी लेता हुआ बोला...
“ओहो कैसी बात कर रहे हैं आप... शर्मिंदा मत करिए लल्लन जी...”
विधायक मुस्कुरा रहा था... और मालती की खूबसूरती से अपनी आँखे सेंक रहा था...
“उम्.... उस दिन आपने मुझे पॉलिटिक्स ज्वाइन करने की सलाह दी थी... लल्लन जी...मैंने काफी सोचा.... और फिर रोक नहीं पाई खुद को...” मालती मुस्कुराती हुई बोली...
मालती की बात सुनकर लल्लन की आँखे चमक गईं... वो खुद को रोक नहीं पाया और अपने काउच से उठ कर मालती के बगल में पड़ी खाली जगह में आकर बैठ गया....
“अरे ये तो अच्छी बात है... तुम जैसी औरतों को तो राजनीति में बढ़ चढ़ कर भाग लेना चाहिए.... मैं तुम्हारे डिसीजन का स्वागत करता हूँ...”
“ओह थैंक यू..लल्लन जी... आपने मुझे मोटिवेट किया... वरना मैं तो इस बारे में कभी सोचती ही नहीं...”
“अरे थैंक यू.. वैंक यू छोड़िये मालती जी... अब ये बताइये क्या लेंगी आप? कुछ सॉफ्ट या हार्ड? वैसे इस मौके पर तो हार्ड ही ठीक बैठेगा...” लल्लन ने मालती का हाथ पकड़ते हुए कहा...
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